शनिवार, 14 अक्टूबर 2023

क्या है ये जीवन ?

 ढलती शाम के साथ किसी के मिल जाने की आस हैं जीवन


 किसी अपने का हर एक रोज इंतजार हैं जीवन

किसी योगी की साधना हैं जीवन

किसी फकीर की जिंदादिली है जीवन 



अपने काम से संतुष्टि हैं जीवन 

अपने काम में तलीनता हैं जीवन 


जीने की कला हैं जीवन

जीने का विज्ञान हैं जीवन


हर एक  हार के बाद जीत की आस हैं जीवन 

हर एक जीत के बाद हार का डर हैं जीवन

 

हजारों की भीड़ में किसी अपने कोई ढूंढती निगाह है जीवन

 हजारों विचारों में से किसी एक को  आत्मसात को करना हैं जीवन 


किसी शिशु के स्तनपान की आस में रूद्रन है जीवन 

माँ का सब कुछ काम छोड़कर उस शिशु को दूध पिलाना हैं जीवन 


माँ का वात्सल्य हैं जीवन

पिता का त्याग  हैं जीवन

बच्चों का बुढ़ापे में माँ-बाप को सहारा हैं जीवन 

दादा-दादी/नाना-नानी का अपने पोते-पोती/ नाति-नातिन के साथ एक बार फिर से बचपन को जीना है जीवन 

 

दादा-दादी से हर रोज एक नई कहानी सुनने की जिद्द  है जीवन

नाना-नानी के घर जाने के लिए गर्मियों की छुटियों का इंतज़ार है जीवन 


किसी किसान के लिए फसल पकाने की तपस्या है जीवन

किसी सैनिक के लिए विश्व शांति की आस है जीवन



किसी राहगीर के लिए रात्रि विश्राम के लिए एक सराय  का इंतज़ाम हैं जीवन 

एक यात्री के लिए वो आखिरी छूटती ट्रेन का आखिरी समय दौड़ कर पकड़ने का सुखद अहसास है जीवन 


किसी विद्यार्थी के लिए वो खेल के एक कालांश का इंतज़ार हैं जीवन

किसी नौकरी-पेशा आदमी के लिए इतवार का इंतज़ार हैं जीवन


किसी प्रेमी का प्रियतमा के एक सन्देश का घंटो इंतज़ार है जीवन 

किसी  प्रियतमा के लिए प्रेमी की एक तारीफ  के लिए संवरना हैं  जीवन



और आप सबका ये पढ़ना और मेरा लिखना हैं जीवन

ज्यादा लिख दिया तो आपका झल्लाकर मुझे शुभ वचन* कहना है जीवन



बाकी आप नीचे comment कर सकते है क्या ये जीवन?😊


✍Ssingh_29 (प्यार ही मूल हैं ❣)

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

तन्हाई....

  लोग पूछते हैं! क्या हो गया हैं तुझे

अक्सर खोया रहता हैं...

अब क्या बताऊँ उन्हें

प्यार हो गया था

और अब ये दिल तन्हा हो गया हैं

मत पूछ मेरे दोस्त ये कैसे हो गया?

मैं तो बच के चल रहा था इस सरोवर से

अचानक नजरें मिली 

और देखते ही देखते चार हुई

और मेरा पैर फिसला 

और मैं भी इस सरोवर में डुबकी लगा आया।

अब ये मत पूछ 

अक्सर संभलकर चलने वाले प्राणी तेरे को ये कैसे हो गया?

क्या बताऊँ मेरे दोस्त एक सपना था हकीकत हो गया

कुछ दिन  तक तो सपना ही समझ रहा था इसे

पर एक दिन आँख मलकर देखा तो हकीकत था

वो कमल चक्षु ,कमानीदार भोहें

और उसकी लहराती जुल्फें किसी को भी ले डूबती

 और मेरे तो सपनों की शहजादी थी

कैसे बच पाता यार

पर इन से सबसे हठकर हैं 

उसकी डिंपल वाले गालों की  मुस्कान

जो पतझड़ में बंसत का अहसास करा दे

निकल ही गया था लगभग इसके किनारे 

पर ये  मुस्कान ले डूबी मुझे मेरे यार।

पर अब लौट आया उन पुराने रंगों

फिर महफिल सजायेंगे, मेरे यार।

✍️Ssingh29(दिल से दिमाग तक....💞😍)

शनिवार, 22 अगस्त 2020

इंतजार....

दिवाकर के इंतजार में
बित रही यह घोर कृष्ण निशा
टिमटिमाते तारों में 
मैं ढूंढ रहा तुम्हें शशि

जब तुमसे मिलने की रह गई हैं आश मात्र
तो इन नुजूम में ढूंढ रहा हूँ अपना प्यारा नज्म़
ताकि बिता सकूँ शुकून से रात्रि के दो पहर ये

थक चुकी हैं अब आँखें ये
पर भूली नहीं है अब भी
बित गए आज के दो पहर निशा के
पौ फट गी है और ये आँखें भी बंद होने चली

पर हे! शशि रहेगा तुम्हारा इंतजार सदा
जब भी तुम लौट आओगे वापिस
पहर दो पहर न सही घडी़ दो घडी़ ही संग जरुर बिताएंगे।
                                     
                                        ✍️शैतान सिंह बिश्नोई

सोमवार, 30 मार्च 2020

कभी इश्क हुआ कभी मोहब्बत...

कभी इश्क हुआ कभी मोहब्बत
तो कभी सच्चे वाला प्यार हुआ।
कभी तुम्हारी मुस्कान पर फिदा हुए
तो कभी  तुम्हारी जुदाई पर तन्हा हुआ।

कभी तुम्हारी दूरियाँ भी दोजख़ सी काट दी
तो कभी तुम्हारे पास होने पर जन्नत का अहसास हुआ ।

आज तुम्हारा सपने में आना
तो यह सोना भी सफल हुआ।

तुम्हारे होने का अहसास हुआ
तो  यह दिल भी दिलबाग हुआ।

जब इस दिल को तुम्हारी बेपनाह याद आई
तो वो  हंसीन लम्हों का अहसास ही इसका सहारा हुआ।

आज जब खलिहानों में बैठा निहार रहा था उन्हें
तो उन में भी तेरे होने का अहसास हुआ।
लहलहाती फसल का छूना
तो ऐसा लगा मानो जैसे तुम्हारी जुल्फें हो।

                         ✍️शैतान सिंह बिश्नोई


रविवार, 29 मार्च 2020

अस्तांचल में छिपता सूरज



अस्तांचल में छिपता सूरज
नवप्रभात की आस में
नव निर्माण की आस में

होगा फिर सवेरा
खगों के पावन गान से

रूक गए हैं पंखेरू
आज की उड़ान से
चल दिए हैं नीड़ों की ओर 

निकलेगें फिर नवप्रभात के साथ में
ओर बढ़ेगें नवसृजन के आस में
                                ✍️शैतान सिंह बिश्नोई😍

मंगलवार, 3 मार्च 2020

मोहब्बत


यह मोहब्बत भी क्या चीज है, जनाब !

हो भी जाती हैं पता भी नहीं चलता।

उसकी आँखों से मेरी आँखें बात भी कर जाती हैं पता ही नहीं चलता।

उसकी चेहरे की मुस्कान पर मेरी मुस्कान कब फिदा हो जाती हैं पता भी नहीं चलता।

जब उसे देखता हूँ तो एक अरसा बित जाता हैं पता ही नहीं चलता।

कब उसकी नामौजूदगी मेें यह दिल उसके होने का अहसास करा जाता हैं पता ही नहीं चलता।

कब उसकी खट्टी- मिठ्ठी यादों मेें खो जाता हूँ पता ही नहीं चलता।

  कब उसके होठों की लालिमा मेरे होठों की लालिमा हो गई पता ही नहीं चला।

इस सुर्ख गुलाबी गालों वाली कब मेरे दिल में आशियाना कर गई पता ही नहीं चला।

उसकी याद में कब यह चंद पंक्तियाँ लिख दी पता ही नही चला।                                                       

                                ✍️Ssingh29😊😊😊😊😊

"मुस्कुराते रहिए और औरों की मुस्कान का कारण बने।

मुस्कराने के लिए एक कारण हजारों गमों पर काफी हैं।"


"मिल जा कोई सपनों की परी या राजकुमार

तो हमें भी इतलाह किजिएगा।

हमें भी रसमलाई से बड़ा प्यार हैं।"😜😘

                                                      ✍️Ssingh29


गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

मुस्कान और मैं....

यह मुस्कान रहे सदा मेरे चेहरे पर, 
ऐसी मैं ख्वाहिश हर दिन हर पहर करता हूँ।                 
जानता हूँ मैं इस मुस्कान के अहं को,
जो मंद-मंद हसँ रही होगी मेरी इस नादानी पर।।                                     
मैं जानता हूँ उस तूफां के कहर को,
 इस मुस्कान के पीछे उफ़ान पर हैं,
जो रोके हुए हैं इस मदमस्त द्वारा ।        
पर लख कोशिश और सब्र के बाद भी जब कभी इस चेहरे की रंगत बदल जाती हैं,
 तो ज्वालामुखी फूट पड़ती हैं।।                                           
इस गर्म लावा के कहर में सब कुछ घुल जाता हैं,
मिट जाती हैं धूमिल सी वो तस्वीर जिन्हें कभी स्वंय पर फ़ख्र हुआ करता था।                                           
पर हर मुसीबत का होता हैं एक रामबाण,
और इसका तो फिर वहीं प्यार के दो शब्दों के साथ नादानी सी मुस्कान।।😊                                       
                              ✍🏼शैतान सिंह बिश्नोई(Ssingh29)