सोमवार, 30 मार्च 2020

कभी इश्क हुआ कभी मोहब्बत...

कभी इश्क हुआ कभी मोहब्बत
तो कभी सच्चे वाला प्यार हुआ।
कभी तुम्हारी मुस्कान पर फिदा हुए
तो कभी  तुम्हारी जुदाई पर तन्हा हुआ।

कभी तुम्हारी दूरियाँ भी दोजख़ सी काट दी
तो कभी तुम्हारे पास होने पर जन्नत का अहसास हुआ ।

आज तुम्हारा सपने में आना
तो यह सोना भी सफल हुआ।

तुम्हारे होने का अहसास हुआ
तो  यह दिल भी दिलबाग हुआ।

जब इस दिल को तुम्हारी बेपनाह याद आई
तो वो  हंसीन लम्हों का अहसास ही इसका सहारा हुआ।

आज जब खलिहानों में बैठा निहार रहा था उन्हें
तो उन में भी तेरे होने का अहसास हुआ।
लहलहाती फसल का छूना
तो ऐसा लगा मानो जैसे तुम्हारी जुल्फें हो।

                         ✍️शैतान सिंह बिश्नोई


4 टिप्‍पणियां: