रविवार, 29 मार्च 2020

अस्तांचल में छिपता सूरज



अस्तांचल में छिपता सूरज
नवप्रभात की आस में
नव निर्माण की आस में

होगा फिर सवेरा
खगों के पावन गान से

रूक गए हैं पंखेरू
आज की उड़ान से
चल दिए हैं नीड़ों की ओर 

निकलेगें फिर नवप्रभात के साथ में
ओर बढ़ेगें नवसृजन के आस में
                                ✍️शैतान सिंह बिश्नोई😍

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