अस्तांचल में छिपता सूरज
नवप्रभात की आस में
नव निर्माण की आस में
नवप्रभात की आस में
नव निर्माण की आस में
होगा फिर सवेरा
खगों के पावन गान से
रूक गए हैं पंखेरू
आज की उड़ान से
चल दिए हैं नीड़ों की ओर
निकलेगें फिर नवप्रभात के साथ में
ओर बढ़ेगें नवसृजन के आस में
✍️शैतान सिंह बिश्नोई😍
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