गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

मुस्कान और मैं....

यह मुस्कान रहे सदा मेरे चेहरे पर, 
ऐसी मैं ख्वाहिश हर दिन हर पहर करता हूँ।                 
जानता हूँ मैं इस मुस्कान के अहं को,
जो मंद-मंद हसँ रही होगी मेरी इस नादानी पर।।                                     
मैं जानता हूँ उस तूफां के कहर को,
 इस मुस्कान के पीछे उफ़ान पर हैं,
जो रोके हुए हैं इस मदमस्त द्वारा ।        
पर लख कोशिश और सब्र के बाद भी जब कभी इस चेहरे की रंगत बदल जाती हैं,
 तो ज्वालामुखी फूट पड़ती हैं।।                                           
इस गर्म लावा के कहर में सब कुछ घुल जाता हैं,
मिट जाती हैं धूमिल सी वो तस्वीर जिन्हें कभी स्वंय पर फ़ख्र हुआ करता था।                                           
पर हर मुसीबत का होता हैं एक रामबाण,
और इसका तो फिर वहीं प्यार के दो शब्दों के साथ नादानी सी मुस्कान।।😊                                       
                              ✍🏼शैतान सिंह बिश्नोई(Ssingh29)